जिंदगी

हर शाम के बाद इतनी काली रात क्यों होती है ,
उस काली रात में बरसात क्यों होती है ??
हम तो सितारों से भी मंजिल तलाश लेते ,
कम्भख्त उनसे भी आज कल मुलाकात कहा होती है ??

ये जिंदगी भी कितनी बेरहम होती है ,
मंजिल दिखती करीब है, मगर पास कहा होती है ??
कहने को तो सब अपने है, काश कोई ऐसा हो ,
जिसे हमारे दर्द से तकलीफ होती है...

खुदा की खुदाई इतनी बेरहम क्यों होती है ,
हर किसी को जिंदगी से शिकायत क्यों होती है ??
मिले खुदा तो उनसे ही पूछ लूँगा ,
जो मिल न सके, मोहब्बत उसी से क्यों होती है...






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