फ़रवरी का महिना, कुछ नया करने का जूनून, कुछ अलग करने की बातें, सब कुछ समझ लेने की आशा, कर गुजरने का माहोल... वो भी दिन थे... वो सबसे पीछे की सीटें, (RUSSIA) ईमानदारी की पढाई, गले में ID कार्ड, चमचमाते जुते, tie-shy में "टिंच" रहना... वो भी दिन थे... फिर हमारी tie उतरी, अनजान चहरों से बात बढ़ी, लखनऊ के नवाब से लेकर, जम्मू की जान मिली, राजिस्थान के राठोड से लेकर, भिलाई की बिल्ली मिली, सागर के शेर से लेकर, ह्य्द्राबाद का भालू मिला... एक comment हमने भी मारा, कुछ addon नवाब का आया, पाण्डेय आगे हस पड़ा था, तांत्रिक भी जरा सा मुस्कुराया... चंडालिका की चान्य-चान्य, कानपूर की जान, "भाई" की लोकल ट्रेनों में बैठे, "पहलवान" की muscles भी देखि, "नवाब" की बकचोदी का सहारा था, "पाण्डेय" सबसे regular हमारा था... "Bang-Broz" की classes अलग थी, पढ़ते कुछ और " पढ़ाते " कुछ और थे... "Bhatija" की खी-खी बंद नहीं होती थी, "Chakri" की साला नींद ही पूरी नहीं होती थी... वो बारिश का मौसम, अल्ताफ राजा के गाने, चाय की चुस्क...