पहचान
खुद अपनी पहचान से अनजान हूँ मैं ,
अपना तार्रुफ़ आपसे करवाऊं कैसे ?
कुछ सिमटी हुई छोटी सी दुनिया है मेरी ,
इस दिल की गहराईयों में आपको ले जाऊं कैसे...
आसमान की उचाईयों तक मेरे ख्वाब बिखरे हैं,
अपना तार्रुफ़ आपसे करवाऊं कैसे ?
कुछ सिमटी हुई छोटी सी दुनिया है मेरी ,
इस दिल की गहराईयों में आपको ले जाऊं कैसे...
आसमान की उचाईयों तक मेरे ख्वाब बिखरे हैं,
अपने अरमानो की हद मैं दिखाऊँ कैसे ?
मुस्कुराना मेरी आदत है आंसुओं को छुपा कर ,
पर हर गम को अपनी हसी से बहलाऊँ कैसे...
दोस्ती ही मेरी चाहत है और दोस्त मेरी ज़िन्दगी ,
इश्क से अपनी बेरुखी का सबब बताऊँ कैसे ?
इश्क से अपनी बेरुखी का सबब बताऊँ कैसे ?
होकर मेरी सरहदों में शामिल ,
आप ही जान लो मुझे ,
किसी और तरह आपको "विनीत" से मिलवाऊँ कैसे ?
किसी और तरह आपको "विनीत" से मिलवाऊँ कैसे ?
खुद अपनी पहचान से अनजान हूँ मैं ,
अपना तार्रुफ़ आपसे करवाऊं कैसे ?
अपना तार्रुफ़ आपसे करवाऊं कैसे ?

veneet babu apki sher padh kar aise laga jaise sukhe hue patto me pani aane ke baad jo khusi ki lahar uthti hai...................ab tak ka sabse acha...........carry on
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