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Showing posts from December, 2010

हकीक़त

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रूठ गए हैं जो साथी, उनको फिर एक बार मनाया जाए, उदास हैं जो दिल, उन्हें आज फिर एक बार हंसाया जाए... ज़िन्दगी का सफ़र कैसे कटेगा ग़मगीन होके ? होंटों पर फिर से तबस्सुम को एक बार सजाया जाए... ख़्वाबों में रहकर जीना नहीं है आसान, ज़िन्दगी की हकीकत को हसकर गले लगया जाए... जोड़ लें टुकड़े दिल के, खुश्क करके आंसू अपने, दिल पे लगे ज़ख्मों को चलो फिर एक बार सहलाया जाए... क्या हुआ जो न मिली एक मंजिल, हैं मंजिलें और अभी बाकी, एक नया मकसद, एक नया रास्ता, एक नयी दुनिया बसाई जाये... जिंदगी जीने के तरीके दो हैं, मुह फेर लो या बनालो सभी को अपना, गिला नही अब रहा किसीसे, चलो जिंदगी मुस्कुराकर ही जी ली जाए... रूठ गए हैं जो साथी, उनको फिर एक बार मनाया जाए, उदास हैं जो दिल, उन्हें आज फिर एक बार हंसाया जाए... ज़िन्दगी का सफ़र कैसे कटेगा ग़मगीन होके ? होंटों पर फिर से तबस्सुम को एक बार सजाया जाए...

जिंदगी

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हर शाम के बाद इतनी काली रात क्यों होती है , उस काली रात में बरसात क्यों होती है ?? हम तो सितारों से भी मंजिल तलाश लेते , कम्भख्त उनसे भी आज कल मुलाकात कहा होती है ?? ये जिंदगी भी कितनी बेरहम होती है , मंजिल दिखती करीब है, मगर पास कहा होती है ?? कहने को तो सब अपने है, काश कोई ऐसा हो , जिसे हमारे दर्द से तकलीफ होती है... खुदा की खुदाई इतनी बेरहम क्यों होती है , हर किसी को जिंदगी से शिकायत क्यों होती है ?? मिले खुदा तो उनसे ही पूछ लूँगा , जो मिल न सके, मोहब्बत उसी से क्यों होती है...

पहचान

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खुद अपनी पहचान से अनजान हूँ मैं , अपना तार्रुफ़ आपसे करवाऊं कैसे ? कुछ सिमटी हुई छोटी सी दुनिया है मेरी , इस दिल की गहराईयों में आपको ले जाऊं कैसे... आसमान की उचाईयों तक मेरे ख्वाब बिखरे हैं,   अपने अरमानो की हद मैं दिखाऊँ कैसे ? मुस्कुराना मेरी आदत है आंसुओं को छुपा कर , पर हर गम को अपनी हसी से बहलाऊँ कैसे... दोस्ती ही मेरी चाहत है और दोस्त मेरी ज़िन्दगी , इश्क से अपनी बेरुखी का सबब बताऊँ कैसे ? होकर मेरी सरहदों में शामिल , आप ही जान लो मुझे , किसी और तरह आपको "विनीत" से मिलवाऊँ कैसे ? खुद अपनी पहचान से अनजान हूँ मैं , अपना तार्रुफ़ आपसे करवाऊं कैसे ?

हालात

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एक वादा था तेरे हर वादे के पीछे, तू मिलेगा मुझसे हर गली, हर मोड़, हर दरवाज़े के पीछे. पर वो अब आधे रस्ते में साथ छोड़ निकले, एक वो ही नहीं होंगे मेरे जनाज़े के पीछे... वो कहते हैं हालात हैं इस गुनाह के पीछे, कहते हैं मजबूरियां हैं इस बेदर्दी के पीछे, हमने तो बस साथ माँगा है उनका, एक वो ही नहीं इन् हालातों के पीछे...  वो कहते हैं कोई नहीं देगा साथ हमारा, अकेले ही लड़ना होगा सभी से, हम कहते हैं थामा है हाथ हमने, हम हैं तुम्हारे कदमो के पीछे... वो कहते हैं की अब भी तुम ही हो दिल में बसे, तुम ही हो हर जज्बात के पीछे, हम कहते हैं तुम हाथ थाम लो हमारा बस, नहीं जरुरत किसी और की हमें अब,  नहीं देना किसी और का साथ, नहीं चलना किसी और के पीछे... एक वादा था तेरे हर वादे के पीछे, तू मिलेगा मुझसे हर गली, हर मोड़, हर दरवाज़े के पीछे. पर वो अब आधे रस्ते में साथ छोड़ निकले, एक वो ही नहीं होंगे मेरे जनाज़े के पीछे...

मर्ज़ी

मुह फेर कर चल दिए , खुदपर ही लगाकर इल्जाम , गिला करें उनसे , या करे उनकी मर्ज़ी को सलाम ? 

ख़ामोशी

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दिल में एक ख़ामोशी सी छाई है, कई दिनों से दिल के दरवाज़े पर कोई आहट नहीं आई है, अब तो लगता है जैसे सारे जज़्बात पराये हो गए हैं, सिर्फ दूर तक मेरी ख़ामोशी ही साथ चली आई है... काश के में लिख सकता अपनी तकदीर खुद, बदल सकता में अपनी तस्वीर खुद, खुद ही से बातें किया करते हैं हम तो आज कल, खुद से पूछते हैं, खुद ही जवाब दिया करते हैं... अब इंतज़ार की आदत सी हो गई है, ख़ामोशी एक हालत सी हो गई है, न शिकवा न सिकायत है किसी से, क्यूंकि अब अकेलेपन से मोहब्बत सी हो गई है... अब हो गयी है मुझे शिकायात अपने ही आईने से, हर घर में विरानगी का मातम सा लगता है, अब तो लगता है जैसे सारे जज़्बात पराये हो गए हैं, और सिर्फ दूर तक मेरी ख़ामोशी ही साथ चली आई है...

धुआं

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आज फिर एक सिगेरट जला रहा हूँ , फिर एक तीली बुझा रा हूँ ... उसकी नज़र में ये एक गुनाह है , मैं उसके वादे भुला रहा हूँ , समझना मत इसको मेरी आदत , मैं तो बस धुआं उड़ा रहा हूँ ... कितने आकर चले गए , कितनो का है इंतज़ार अभी , मैं तो खड़ा बस छल्ले बना रहा हूँ ... कोई हो पास तब भी ठीक , न हो तब भी किसका है गम , धुंए में सुकून धुन्ड़ता चला जा रहा हूँ ... ये उसकी यादों के सिलसिले हैं , मैं उसकी यादें जला रहा हूँ ... मैं पिके इतना बहक चूका हूँ , की गम के किस्से सुना रहा हूँ , अगर तुम्हे भी गम है किसी बात का , तो पास आओ हुजुर , मैं पी रहा हूँ पिला रहा हूँ ... सिगेरट की शमा के बहाने , मैं अपने आपको जला रहा हूँ ... फिर एक सिगेरटजला रहा हूँ ... P.S : SM()KING IS INJURIES TO HEALTH N WEALTH !!! :P ;)

इकरार

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आँखों के सहारे आँखों मैं उतर आओ, और इन्हें समुन्दर कर दो.. आँखें झुकाए विनीत बस दिल में बस जाओ, और इसे जन्नत कर दो.. इकरारे मोहब्बत जब किया था मैंने, वही थमा सा वक़्त फिर अदा कर दो.. नज़रें झुका कर मुस्कुराये थे तुम भी, उसी मुस्कान को हमपर जिया कर दो.. टूट के मिलो की अरमान न रह जाये कोई बाकी, कुछ देर ही सही मोहबत की नज़र कर दो.. हम पे न आये कोई क़यामत सा वक़्त कभी, यूँ मोहब्बत के लम्हों को तुम अमृता कर दो.. बड़ा मुश्किल है ये जुदाई का आलम, इसे अपनी मोजुदगी से मुख्तासिर कर दो.. दुनिया की तलब नहीं मगर ये हसरत है हमारी, अपनी बाँहों मैं भरकर दुनिया से बेखबर कर दो.. जानते नहीं थे की बेंतेहा चाहते है आप हमें, जानलो हमें भी और बंदिशों को इन फना कर दो.. मांगते हैं तुम्ही को हम सुबह शाम अब, तुम भी अब उस खुदा से रज़ा कर दो.. आँखों के सहारे आँखों मैं उतर आओ, और इन्हें समुन्दर कर दो.. आँखें झुकाए विनीत बस दिल में बस जाओ, और इसे जन्नत कर दो..

भीगी सी रात

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एक भीगी सी रात मिले उस रात में तेरा साथ मिले , तेरे लब से टपकें जो बूंदें उन्हें मेरे लबों का साथ मिले , कुछ तुम भी बहके बहके से कुछ मुझे पे नशा सा तारी हो, बस एक भीगी सी रात मिले उस रात में तेरा साथ मिले .... उस रात की सुबह न हो कभी चाँद भी हमारे साथ चले , मद्धम सी चांदनी बरसे नभ से न पास हमारे कोई शमा जले , निगाहों से निगाहों की जुफ्त्गु हो बस सांसें भी हमारी एक साथ चलें , बस एक भीगी सी रात मिले उस रात में तेरा साथ मिले ...