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Showing posts from December, 2015

देख लिया...

जब घटनायें छाती के ऊपर भार बने, जब सांस ना दिल को लेने दे आज़ादी से..  टूटी आशाओं के खंडहर, टूटे सपने तब, अपने मन की बेचैनी को छनदो में संचित कर..  लेकिन मेरा तो भार बना ज्यूँ का त्युन है,  ज्यूँ के त्योन बंधन हैं,  ज्यूँ की त्युन बाधायें, मैने गीतों को रज करके भी देख लिया...  वो काहिल है जो आसमान के पर्दे पर,  अपने मन की तस्वीर बनाया करते हैं.. नभ को छूने की ख्वाहिश में, तमाम छलांगे लगाया करते हैं..  सोने के सपनो को, चाँदी की चम्मच से मैने भी एक बार, चख कर के देख लिया..  मैने सपनो को सज करके भी देख लिया...  रिंदो ने मुझसे कहा की मदिरा पान करो,  गम-ग़लत, इसी से होगा मैने मान लिया...  मैं प्याले मे डूबा, प्याला मुझ मे डूबा,  मित्रों ने मेरे मंसूबों को मान दिया... बन्दो ने मुझसे कहा की ये कमज़ोरी है इसको छोड़ो, अपनी इच्छा का बल देखो, मैने उनका भी कहना कान किया..  मैने मदिरा को पी करके भी देख लिया... मैने मदिरा को तज करके भी देख लिया...  मैने सपनो क...

Someone Said ...

Jim Morrison said it best: "all the children are insane," and he meant it like I mean it. We are children revolted by the banality of what people think is sane. When Jim rambled, quite profoundly, "Rock & roll is dead," and "Hitler is still alive.... I slept with her last night," he knew then what we are choking on now. You can't change the world, and if you try, you just end up destroying it. We love all things to death. We leave the lights on, turn everything up to 10 and fuck everything we fear.