हकीक़त
रूठ गए हैं जो साथी, उनको फिर एक बार मनाया जाए, उदास हैं जो दिल, उन्हें आज फिर एक बार हंसाया जाए... ज़िन्दगी का सफ़र कैसे कटेगा ग़मगीन होके ? होंटों पर फिर से तबस्सुम को एक बार सजाया जाए... ख़्वाबों में रहकर जीना नहीं है आसान, ज़िन्दगी की हकीकत को हसकर गले लगया जाए... जोड़ लें टुकड़े दिल के, खुश्क करके आंसू अपने, दिल पे लगे ज़ख्मों को चलो फिर एक बार सहलाया जाए... क्या हुआ जो न मिली एक मंजिल, हैं मंजिलें और अभी बाकी, एक नया मकसद, एक नया रास्ता, एक नयी दुनिया बसाई जाये... जिंदगी जीने के तरीके दो हैं, मुह फेर लो या बनालो सभी को अपना, गिला नही अब रहा किसीसे, चलो जिंदगी मुस्कुराकर ही जी ली जाए... रूठ गए हैं जो साथी, उनको फिर एक बार मनाया जाए, उदास हैं जो दिल, उन्हें आज फिर एक बार हंसाया जाए... ज़िन्दगी का सफ़र कैसे कटेगा ग़मगीन होके ? होंटों पर फिर से तबस्सुम को एक बार सजाया जाए...