भ्रम...
जगत की सारी रचना भ्रम है, पांच तत्वों की घटना भ्रम है, मन की तुम्हारी व्यथा भी भ्रम है, संसार की हर एक कथा ही भ्रम है... हसना-खेलना, रोना-धोना, मानव जैसे बस एक खिलौना, इस खिलोन की काया भ्रम है, सारे मोह और माया भ्रम है.... स्वर्ग-नरक सब लोक-लोकांतर, जंतर-मंतर सब जनम-जनमांतर, नित्य करो तो वो भी भ्रम है, अनित्य करो तो वो भी भ्रम है... निराकार और साकार भ्रम है, इश्वर-अल्लाह-ओमकार भ्रम है, सत्य तो वो जो विनशे नाही, और जो विनशे वो भी भ्रम है...