देख लिया...
जब घटनायें छाती के ऊपर भार बने, जब सांस ना दिल को लेने दे आज़ादी से.. टूटी आशाओं के खंडहर, टूटे सपने तब, अपने मन की बेचैनी को छनदो में संचित कर.. लेकिन मेरा तो भार बना ज्यूँ का त्युन है, ज्यूँ के त्योन बंधन हैं, ज्यूँ की त्युन बाधायें, मैने गीतों को रज करके भी देख लिया... वो काहिल है जो आसमान के पर्दे पर, अपने मन की तस्वीर बनाया करते हैं.. नभ को छूने की ख्वाहिश में, तमाम छलांगे लगाया करते हैं.. सोने के सपनो को, चाँदी की चम्मच से मैने भी एक बार, चख कर के देख लिया.. मैने सपनो को सज करके भी देख लिया... रिंदो ने मुझसे कहा की मदिरा पान करो, गम-ग़लत, इसी से होगा मैने मान लिया... मैं प्याले मे डूबा, प्याला मुझ मे डूबा, मित्रों ने मेरे मंसूबों को मान दिया... बन्दो ने मुझसे कहा की ये कमज़ोरी है इसको छोड़ो, अपनी इच्छा का बल देखो, मैने उनका भी कहना कान किया.. मैने मदिरा को पी करके भी देख लिया... मैने मदिरा को तज करके भी देख लिया... मैने सपनो क...