इकरार
आँखों के सहारे आँखों मैं उतर आओ,
और इन्हें समुन्दर कर दो..
आँखें झुकाए विनीत बस दिल में बस जाओ,
और इसे जन्नत कर दो..
इकरारे मोहब्बत जब किया था मैंने,
वही थमा सा वक़्त फिर अदा कर दो..
नज़रें झुका कर मुस्कुराये थे तुम भी,
उसी मुस्कान को हमपर जिया कर दो..
टूट के मिलो की अरमान न रह जाये कोई बाकी,
कुछ देर ही सही मोहबत की नज़र कर दो..
हम पे न आये कोई क़यामत सा वक़्त कभी,
यूँ मोहब्बत के लम्हों को तुम अमृता कर दो..
बड़ा मुश्किल है ये जुदाई का आलम,
इसे अपनी मोजुदगी से मुख्तासिर कर दो..
दुनिया की तलब नहीं मगर ये हसरत है हमारी,
अपनी बाँहों मैं भरकर दुनिया से बेखबर कर दो..
जानते नहीं थे की बेंतेहा चाहते है आप हमें,
जानलो हमें भी और बंदिशों को इन फना कर दो..
मांगते हैं तुम्ही को हम सुबह शाम अब,
तुम भी अब उस खुदा से रज़ा कर दो..
आँखों के सहारे आँखों मैं उतर आओ,
और इन्हें समुन्दर कर दो..
आँखें झुकाए विनीत बस दिल में बस जाओ,
और इसे जन्नत कर दो..
और इन्हें समुन्दर कर दो..
आँखें झुकाए विनीत बस दिल में बस जाओ,
और इसे जन्नत कर दो..
इकरारे मोहब्बत जब किया था मैंने,
वही थमा सा वक़्त फिर अदा कर दो..
नज़रें झुका कर मुस्कुराये थे तुम भी,
उसी मुस्कान को हमपर जिया कर दो..
टूट के मिलो की अरमान न रह जाये कोई बाकी,
कुछ देर ही सही मोहबत की नज़र कर दो..
हम पे न आये कोई क़यामत सा वक़्त कभी,
यूँ मोहब्बत के लम्हों को तुम अमृता कर दो..
बड़ा मुश्किल है ये जुदाई का आलम,
इसे अपनी मोजुदगी से मुख्तासिर कर दो..
दुनिया की तलब नहीं मगर ये हसरत है हमारी,
अपनी बाँहों मैं भरकर दुनिया से बेखबर कर दो..
जानते नहीं थे की बेंतेहा चाहते है आप हमें,
जानलो हमें भी और बंदिशों को इन फना कर दो..
मांगते हैं तुम्ही को हम सुबह शाम अब,
तुम भी अब उस खुदा से रज़ा कर दो..
आँखों के सहारे आँखों मैं उतर आओ,
और इन्हें समुन्दर कर दो..
आँखें झुकाए विनीत बस दिल में बस जाओ,
और इसे जन्नत कर दो..

awsum...too gud........
ReplyDeleteThnk u bhai jaan !!! :D
ReplyDeletesahi vineet babu......luved third stanza..:) ;)
ReplyDeleteSaraf-fat se manoge nhin tum... mast h mast h...
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