ना हम मुस्कुराते...
ना हम मुस्कुराते, ना तुम सर झुकाते... ना तुम नज़र उठाते, ना हम नज़र मिलते... ज़िकर में तेरे हम यूँ ना कुछ कह जाते, यूँही ना तेरे अक्स में इस तरह सिमट जाते... मासूम से तेरे चेहरे में हम ना खो जाते, अगर तुम हमसे यूँ नज़रें ना मिलाते... यादों के सहारे तेरी रातें ना गुज़ारा करते, महफ़िलों में बैठे यूँ तनहा ना रह जाते... तेरे बारे में सोचकर हम यूँ ना अश्क बहाते, काश तुम उस दिन अपनी नज़रें ना उठाते... अपने दिल को हमने तुम्हारा महलसरा बना लिया, काश उसको एक मकबरा बना लेते... दर्द ना होता इतना फिर शायद, वक़्त के साथ सारे ज़ख़्म सुख जाते... ना हम मुस्कुराते, ना तुम सर झुकाते... ना तुम नज़र उठाते, ना हम नज़र मिलते... -- Archit Jain ( Edited by me )