तेरे बगैर...
तेरे बगैर वो दिन भी घुज़र गए आखिर, तेरे बिना ये दिन भी घुज़रते जाते हैं... जलाने की कोशिशें करता हूँ तेरी तस्वीर जहन से भी पर, राहत तेरे तसवुर की पाकर, जलकर खुद भी उसे जला नहीं पाता... लिखता भी हूँ नाम तेरा हवाओं पे गर, दीखता है पल दो पल, पर धुंए में वो भी तो टिक नहीं पाता... मेरी रूह को तन्हाई की ज़ंजीर पहना कर, तू मेरे पास तो होता है, पर जाने क्यों मेरा नहीं हो पाता... तेरे बगैर वो शाम भी घुज़र गयी थी आखिर, तेरे बिना ये शाम भी ढलती जाती है...