अनंत से पहले, अंत के आगे ... धुआं ही तो है ... भोले का तांडव सम्ह्झाये, भभूत में ज्योत जलाये... सब धुआं ही तो है ... मोहब्बत की गरमाई से गहन, जुदाई की तपिश से तपन... धुआं ही तो है ... म्र्युतय को मुर्चित करे, अमृत को करे अमर... धुआं ही ओत है ... अंधकार को अँधा करे, प्रकाश को करे परे... धुआं ही तो है ... सूर्य की तेज किरणों से तपित, चन्द्रमा की चांदनी से रोशन... धुआं ही तो है ... अनंत से पहले, अंत के आगे ... धुआं ही तो है ... भोले का तांडव सम्ह्झाये, भभूत में ज्योत जलाये... सब धुआं ही तो है ... -= बम भोलेनाथ =-
hmm.....
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ReplyDeleteyeh dil maange more sirji...... ;)
ReplyDeletearre koi nahi yaar..aise din to aate jate hai.....enjoy life.....
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