धुआं

आज फिर एक सिगेरट जला रहा हूँ ,
फिर एक तीली बुझा रा हूँ ...
उसकी नज़र में ये एक गुनाह है ,
मैं उसके वादे भुला रहा हूँ ,
समझना मत इसको मेरी आदत ,
मैं तो बस धुआं उड़ा रहा हूँ ...

कितने आकर चले गए ,
कितनो का है इंतज़ार अभी ,
मैं तो खड़ा बस छल्ले बना रहा हूँ ...
कोई हो पास तब भी ठीक ,
न हो तब भी किसका है गम ,
धुंए में सुकून धुन्ड़ता चला जा रहा हूँ ...

ये उसकी यादों के सिलसिले हैं ,
मैं उसकी यादें जला रहा हूँ ...
मैं पिके इतना बहक चूका हूँ ,
की गम के किस्से सुना रहा हूँ ,
अगर तुम्हे भी गम है किसी बात का ,
तो पास आओ हुजुर ,
मैं पी रहा हूँ पिला रहा हूँ ...

सिगेरट की शमा के बहाने ,
मैं अपने आपको जला रहा हूँ ...
फिर एक सिगेरटजला रहा हूँ ...

P.S : SM()KING IS INJURIES TO HEALTH N WEALTH !!! :P ;)

Comments

  1. ये उसकी यादों के सिलसिले हैं ,
    मैं उसकी यादें जला रहा हूँ .....too gud man....;)

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  2. thnks guyz.. keep readin.. n keep suggestin too.. :) :) :)

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  3. Nice lines vineet babu....fukin deep...:)

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