भीगी सी रात

एक भीगी सी रात मिले
उस रात में तेरा साथ मिले ,
तेरे लब से टपकें जो बूंदें
उन्हें मेरे लबों का साथ मिले ,
कुछ तुम भी बहके बहके से
कुछ मुझे पे नशा सा तारी हो,
बस एक भीगी सी रात मिले
उस रात में तेरा साथ मिले ....

उस रात की सुबह न हो कभी
चाँद भी हमारे साथ चले ,
मद्धम सी चांदनी बरसे नभ से
न पास हमारे कोई शमा जले ,
निगाहों से निगाहों की जुफ्त्गु हो बस
सांसें भी हमारी एक साथ चलें ,
बस एक भीगी सी रात मिले
उस रात में तेरा साथ मिले ...



Comments

  1. kya baat hai.....तेरे लब से टपकें जो बूंदें
    उन्हें मेरे लबों का साथ मिले ,
    ye dono line katilana hai........bahut khub farmaya

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