मोहब्बत...
टपकती है निगाहों से, बरसती है अदाओं से,
कौन कहता है, "मोहब्बत" पहचानी नहीं जाती...
चहरे की शोखियों से, बयां होतो समझलेना,
दास्ताँ-ए-वफ़ा ऐसी, मुह जबानी बयां नहीं होती...
शोहरत हो या हो दौलत, बोली लगाओगे कैसे ?
कीमत दिल हार कर भी जिसकी, यारों चुकाई नहीं जाती...
समझ जाओ तो कुदरत, वरना बस यही फुरकत,
कौन कहता है, रूह तुम्हारी बेगानी नहीं होती...
कौन कहता है, "मोहब्बत" पहचानी नहीं जाती...
चहरे की शोखियों से, बयां होतो समझलेना,
दास्ताँ-ए-वफ़ा ऐसी, मुह जबानी बयां नहीं होती...
शोहरत हो या हो दौलत, बोली लगाओगे कैसे ?
कीमत दिल हार कर भी जिसकी, यारों चुकाई नहीं जाती...
समझ जाओ तो कुदरत, वरना बस यही फुरकत,
कौन कहता है, रूह तुम्हारी बेगानी नहीं होती...

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