इतिहास

आये थे हम बेनाम शहरों से,
कुछ जुटाने के लिए कुछ मिटाने के लिए...
सोचा था जिंदगी सवर जाएगी अपनी भी,
क्या पता था जिंदगी से अभी मुलाकात होनी बाकी है...

आये थे हम भी तलाश में एक,
कुछ सपने इन नादान आँखों में लिए...
सोचा था हमे भी पनाह मिलेगी यहीं कहीं,
क्या पता था गुमनामी से अभी मुलाकात होनी बाकी है...

आये थे जिन कच्ची गलिओं से,
पत्थर से मजबूत इरादे लिए...
सोचा था पा लेंगे दुनिया सारी अब,
क्या पता था दर-बदर की ठोखरें खाना बाकी है...

आये थे तब कुछ अलग फ़साने थे,
साथी कोई था नहीं साथ निभाने के लिए...
सोचा था बनाते चलेंगे राह अपनी खुद,
क्या पता था अभी दोराहों पर आना बाकी है...

आये थे खाली दिल लिए हम यहाँ,
यारों की यारी से इसे भरने के लिए...
सोचा था साथ रहेगी दोस्ती अब हमारे,
क्या पता था अभी मिलके जुदा होना बाकी है...

आये बेशक थे खाली हाथ,
अधूरी सी कहानी पूरी करने के लिए...
सोचा नहीं था शयाही,पन्नो और पात्रों के बारे में,
मजिल दूर है अभी यारों और इतिहास लिखना अभी बाकी है...

आये थे हम बेनाम शहरों से,
कुछ जुटाने के लिए कुछ मिटाने के लिए...
सोचा था जिंदगी सवर जाएगी अपनी भी,
क्या पता था जिंदगी से अभी मुलाकात होनी बाकी है...

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