अँधेरे

मिटा सको तो मिटाओ बहुत अँधेरा है,
चिराग बनके दिखाओ, बहुत अँधेरा है...
बिचड़ गए वो हमसे कहीं ज़िन्दगी की राहों मे,
अभी न शमा बुझाओ, बहुत अँधेरा है...

ज़िन्दगी भी हमारी हथेली चूम गयी है,
सांसें चलती हैं पर नब्ज, जरा थमी सी है...
बिना कहे-सुने कुछ हमारी-तुम्हारी यूँ गए हो तुम,
अभी भी दिल में कसक और आँखों में नमी सी है...

पर समय ने जब भी अंधेरों से दोस्ती की है,
जला के हमने अपना घर रौशनी की है...
सुबूत हैं मेरे घर में धुंए के ये धब्बे,
अभी-अभी यहाँ उजालों ने ख़ुदकुशी की है...

Comments

Popular posts from this blog

धुआं ही तो है ...

Absence...