मजबूरियां...

मजबूरियों को हम बस,
आँखों में छुपा लिया करते हैं...
हम कहाँ रोते हैं बस,
हालात रुला दिया करते हैं...

हम तो हर पल उन्ही को याद किया करते हैं,
पर वो, याद ना करने का इलज़ाम लगा दिया करते हैं...

चाहते तो हम भी थे चलना इक सफ़र सुहाना ज़िन्दगी का,
पर अँधेरे, अधूरे से रास्ते हमें गुमनाम बना ही दिया करते हैं...

मजबूरियों को हम बस,
आँखों में छुपा लिया करते हैं...
हम कहाँ रोते हैं बस,
हालात रुला दिया करते हैं...

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