दीवाने...

सज़ा पे छोड़ दिया, जहां पे छोड़ दिया,
हर एक काम को हमने खुदा पे छोड़ दिया...

वो हमको याद रखें या फिर भुला दें अब,
उसी का काम था, उसी की रज़ा पे छोड़ दिया...

अब उसकी मर्ज़ी भुझा दे, या जला दे,
चिराग हमने जला के हवा पे छोड़ दिया...

अब उससे बात किये बगैर कैसे रहेंगे हम ?
ये मसला दुआ का था, सो दुआ पे छोड़ दिया...

इसलिए तो वो कहते हैं दीवाने हम को,  

हमने तो ये सारा ज़माना वफ़ा पे छोड़ दिया...

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