सावन...
धरती से सावन की बूंदें मिलने जब भी आती हैं,
उसकी शिकायत करती हैं कुछ अपना दर्द सुनती हैं...
कुछ रिश्ते नए बनाती, एहसास नया दे जाती हैं,
हर एक कली को फूल, बाग़ को गुलशन कर जाती हैं...
चाहत नयी सी होती है, अरमान नया दे जाती हैं,
कुछ ख़ुशी के पल, कुछ मुस्कान नयी दे जाती हैं...
धरती से सावन की बूंदें मिलने जब भी आती हैं,
उसकी शिकायत करती हैं कुछ अपना दर्द सुनती हैं...
-अज्ञात
उसकी शिकायत करती हैं कुछ अपना दर्द सुनती हैं...
कुछ रिश्ते नए बनाती, एहसास नया दे जाती हैं,
हर एक कली को फूल, बाग़ को गुलशन कर जाती हैं...
चाहत नयी सी होती है, अरमान नया दे जाती हैं,
कुछ ख़ुशी के पल, कुछ मुस्कान नयी दे जाती हैं...
धरती से सावन की बूंदें मिलने जब भी आती हैं,
उसकी शिकायत करती हैं कुछ अपना दर्द सुनती हैं...
-अज्ञात

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