कौन हो तुम

आग, कभी-कभी रौशनी...
कहीं-कहीं शोर, रौनकें...

कहीं आग-आग, कहीं धुंआ-धुँआ,
कभी आस-पास, कभी यहाँ-वहाँ,
कभी शोर हो तुम, कभी मोअन हो तुम,
कौन हो तुम...

तुम्हे नाम दिया है मैंने एक,
तुम्हे शकल दे रहा हूँ,
दर्द से गहेरे, सोच से ऊँचे..
प्यार से उजले नक्श,
तुम्हारे ज़हेन में मेरे...
धुन्दले धुन्दले...
कोई सच हो, या उलझा हुवा ख्याल हो तुम,
कौन हो तुम...

जिसकी तस्वीर निघाओं में,
तस्वीर में देखे रंग कई...
रंगों में मौसम बहार का,
तेरी जीत का, मेरी हार का,
इनकार का, इंतज़ार का,
इकरार का, तकरार का,
भीगा सा एक रंग ये भी है प्यार का...

आग, कभी-कभी रौशनी...
कहीं-कहीं शोर, रौनकें...

P.S : Inspired from a song..

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